Popular Posts

Sunday, May 25, 2008

Bujhte Chiraag Jalte Hain


वो चुप रहे तो मेरे दिल के दाग जलते है जो बात कर लें तो बुझते चिराग जलते है कहो बुझे के जलें ?हम अपनी राह चलें यातुम्हारी राह चलें ?बुझे तो ऐसे के जैसे किसी गरीब का दिल जलें तो ऐसे के जैसे चिराग जलते है वो चुप रहेन तो मेरे दिल के दाग जलते है ये खोयी खोयी नज़र कभी तो होगी इधर या सदा रहेगी उधर ?उधर तो एक सुलगता हुआ है वीराना मगर इधर तो बहारों में बाग़ जलते है वो चुप रहेन तो मेरे दिल के दाग जलते है जो अश्क पी भी लिएजो होंठ सी बी ही लिएतो सितम ये किस्पे किये ?कुछ आज अपनी सुनाओ कुछ आज मेरी सुनो खामोशियों से तो दिल और दिमाग जलते है वो चुप रहेन तो मेरे दिल के दाग जलते है जो बात कर लें तो बुझते चिराग जलते है

1 comment:

Divya Prakash said...

बढ़िया लिखा है ....थोडा और बेहतर हो सकता था ..शुरू की 3 पंक्तियों के बाद ...आखिरी तक जाते जाते कविता अपनी लय पकड़ लेती है ....
दिव्य प्रकाश